हुमायूँ का मकबरा वर्ल्ड हेरिटेज साइट कब व कैसे बना?

राजधानी दिल्‍ली में हुमायूं का मकबरा महान मुगल वास्‍तुकला का एक उत्‍कृष्‍ट नमूना है। वर्ष 1570 में निर्मित यह मकबरा विशेष रूप से सांस्‍कृतिक महत्‍व रखता है, क्‍योंकि यह भारतीय उप-महाद्वीप पर प्रथम मकबरा था। हुमायूँ का मक़बरा नई दिल्ली के पुराने क़िले के निकट संत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह ऐतिहासिक स्‍मारक हुमायूं की रानी हाजी बेगम ने लगभग 1.5 मिलियन की लागत पर निर्मित कराया था। इस मकबरे की संकल्‍पना उन्‍होंने तैयार की थी। हुमायूं का मकबरा मुख्य रूप से ईटों और लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है। एक रास्ता तोड़ने के लिए जिसे सफेद संगमरमर से रेखांकित कर बनाया गया है। सफेद और काले संगमरमर व पीले बलुआ पत्थर का प्रयोग इमारत को सजाने के लिए किया गया है। यहां के फर्श खिड़कियों की जालिया और दरवाजे के ढांचे वर्चस्व स्थापित करता केंद्र का गुंबद सभी संगमरमर के बने हुए हैं।


हुमायूं का मकबरा
हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा भारत का पहला ऐसा निर्माण है। जिसने परिश्रम पद्धति के दोहरे गुंबद बनावट को अपनाया है। इस बनावट में गुंबद की दो सतह होती हैं बाहरी गुंबद खूबसूरत संगमरमर का आवरण होता है और अंदर का गुंबद संगमरमर के बाहरी ढांचे को आधार और पूरी रचना को चांद सा आकार देता है। गुंबद का यह ताज 42.5 मीटर ऊंचा है और इसके ऊपर पश्चिमी पद्धति में आम तौर से पाए जाने वाला छह मीटर लंबा एक पीतल का शिखर जिसकी चोटी पर एक चांद स्थित है। यह पूरी संरचना एक 12,000 वर्ग मीटर के एक वर्ग आकार तहखाने की छत पर बना है जो जमीन से तकरीबन 8 मीटर ऊंचा है। मुख्य कमरे में जाने के लिए सीडियां चढ़नी पड़ती है जो सीधे उस केंद्रीय उत्कृष्ट कोणीय कक्ष में खुलती हैं। जहां पर यह यादगार स्थित है तीन अष्ठकोणीय कक्ष है जिनका निर्माण एक दूसरे से तिरछे में किया गया है।


हुमायूं का मकबरा
हुमायूं का मकबरा

यह मकबरा एक ऊंचे चबूतरे पर बना है जिस पहुंचने के लिये दक्षिण ओर से सात सीढ़ियां बनी हैं। यह वर्गाकार है और इसके अकेले कक्ष के ऊपर एक दोहरा गुम्बद बना है। अंदर दो कब्रों पर कुरआन की आयतें खुदी हुई हैं। इनमें से एक कब्र पर 999 अंक खुदे हैं, जिसका अर्थ हिजरी का वर्ष 999 है जो 1590-91 ई. बताता है। इन कक्षों में तीन मेहराबे हैं जिसमें से बीच की मेहराब सबसे बडी है हुमायूं के मकबरे में एक बहुत बड़ा वर्ग आकार बगीचा भी बनाया गया है और यह बगीचा और भी कई छोटे- मुगल पद्धति की पगडंडियों में विभाजित है। इस परिसर के बीचो-बीच पानी की दो शांत नहरे हैं जो मानव कब्र के नीचे से एक सीध में बहती हुई नजर आती है जिनका जिक्र कुरान शरीफ की आयतों में जन्नत के बगीचे के नीचे बहती 4 नदियों जैसा ही है। इस परिसर के दक्षिण पूर्व में 1590 में निर्मित एक गुंबद भी है जिसे नाई का गुंबद भी कहा जाता है यह मुगलों के साही नाई का मजार है। उनके द्वारा ताउम्र की गई सेवा और शाही खानदान के प्रति वफादारी को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी शाही मजार इस साही परिसर में बनाई गई है। हुमायूँ के मकबरे की भव्य सुन्दरता के कारण ही हुमायूं के मकबरे को 1993 में यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। जो किसी भी प्राकृतिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थान को दिया जाने वाला सबसे ऊंचा सम्मान है।

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